यहां सब 'Jawahar Lal Nehru' ही आते हैं...खुशदीप
डॉ अनवर जमाल भाई ने ई-मेल से एक लिंक भेजा... आप क्या जानते हैं हिंदी ब्लॉगिंग की मेंढक शैली के बारे में ? Frogs online…
गुरुवार, अगस्त 04, 2011डॉ अनवर जमाल भाई ने ई-मेल से एक लिंक भेजा... आप क्या जानते हैं हिंदी ब्लॉगिंग की मेंढक शैली के बारे में ? Frogs online…
Khushdeep Sehgal
गुरुवार, अगस्त 04, 2011
दिल तो बच्चा है जी... कुछ भी चाह सकता है... कभी खुश होकर उछलने लगता है... गाने लगता है...आज मैं ऊपर, आसमां नीच…
Khushdeep Sehgal
शनिवार, मई 14, 2011
आज की दुनिया को समझना, आज के रिश्तों को समझना...बड़ा मुश्किल है...खास कर हम जैसों के लिए जिन्होंने छोटे शहरों से आकर …
Khushdeep Sehgal
रविवार, मार्च 13, 2011
तारीख- 19 दिसंबर 2010 जगह- दिल्ली के चाणक्यपुरी में छत्तीसगढ़ भवन वक्त- शाम छह बजे से नौ बजे रात छत्तीसगढ़ भवन…
Khushdeep Sehgal
सोमवार, दिसंबर 20, 2010
आज जोकर के पिटारे में बहुत कुछ है... थोड़ा विचार...थोड़ी खबर...थोड़ा गाना-बजाना, थोड़ा हंसना-हंसाना ...यानि चांद पर मक्…
Khushdeep Sehgal
गुरुवार, अक्टूबर 07, 2010
ब्लॉगिंग की हर शह का इतना ही फ़साना है, इक पोस्ट का आना है, इक पोस्ट का जाना है... कहीं टिप्पणियों का टोटा, कहीं खजा…
Khushdeep Sehgal
रविवार, सितंबर 12, 2010
ब्लॉग जगत में आजकल जो लिखा जा रहा है, उसे दबा कर पढ़ रहा हूं...लेकिन कमेंट कहीं नहीं दे पा रहा हूं...उसके पीछे मेरी व्य…
Khushdeep Sehgal
गुरुवार, सितंबर 02, 2010
कल सफ़र को जहां छोड़ा था, आज वहीं से आगे बढ़ाता हूं...चार-पांच महीने पहले सतीश सक्सेना जी से मेरी पहली मुलाकात अविनाश …
Khushdeep Sehgal
मंगलवार, अगस्त 17, 2010
ब्लॉगिंग का मेरा एक साल पूरा होने पर आप सब के साथ यादों का एक झरोखा...लेकिन सबसे पहले बात ' ब्लॉगिंग के सरदार'…
Khushdeep Sehgal
सोमवार, अगस्त 16, 2010
ब्लॉगिंग को देखा तो ये ख्याल आया, जिंदगी धूप, ब्लॉगिंग घना साया, ब्लॉगिंग को देखा.... न कुछ लिखें, आज फिर दिल ने…
Khushdeep Sehgal
गुरुवार, जुलाई 15, 2010
कल अवधिया जी की पोस्ट पढ़ कर मज़ा आ गया...वाकई ब्लॉगर के मन की दशा को अवधिया जी ने हू-ब-हू लफ्ज़ों में उतार दिया...अपन…
Khushdeep Sehgal
मंगलवार, जुलाई 13, 2010
नहीं, नहीं मैं कहीं टंकी-वंकी पर चढ़ने नहीं जा रहा...क्योंकि आप उतरने को कहोगे तो शोले के सांभा की तरह मेरे घुटने दर्द …
Khushdeep Sehgal
रविवार, अप्रैल 18, 2010
कल मैंने पोस्ट लिखी थी आंखों का भ्रम ...उसमें लिखा था कोई भी बात हो जब तक सारे तथ्यों का पता न हो, नतीजा निकालने की जल्…
Khushdeep Sehgal
शनिवार, अप्रैल 10, 2010
कल मैं बरेली से लौटा...कुछ छूटे हुए पोस्ट पढ़ने शुरू किए...पता चला कि अलबेला खत्री जी ने तीन श्रेणियों में मतों के ज़र…
Khushdeep Sehgal
मंगलवार, जनवरी 05, 2010
ओ, तुमसे दूर रह कर हमने जाना, प्यार क्या है दिल ने माना, यार क्या है... तुमको पाके न पहलू में लगता था यूं जीते हैं …
Khushdeep Sehgal
सोमवार, जनवरी 04, 2010