Rana Sehri
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...यहां सब के सर पे सलीब है...खुशदीप
अलविदा जग'जीत'... 8 फरवरी 1941---10 अक्टूबर 2011 कोई दोस्त है न रक़ीब है, तेरा शहर कितना अजी…
सोमवार, अक्टूबर 10, 2011अलविदा जग'जीत'... 8 फरवरी 1941---10 अक्टूबर 2011 कोई दोस्त है न रक़ीब है, तेरा शहर कितना अजी…
Khushdeep Sehgal
सोमवार, अक्टूबर 10, 2011
सिर्फ़... मैं उस वक्त में लौटना चाहता हूं जब... मेरे लिए मासूमियत का मतलब, सिर्फ खुद का असल होना था... मेरे …
Khushdeep Sehgal
बुधवार, जुलाई 20, 2011
कल पहले हमें जेब खर्च के लिए 50 रुपये हर महीने मिला करते थे, हम उसमें से न स्कूल की आधी छुट्टी में जमकर खाते थे, …
Khushdeep Sehgal
शनिवार, सितंबर 04, 2010
ब्लॉगिंग को देखा तो ये ख्याल आया, जिंदगी धूप, ब्लॉगिंग घना साया, ब्लॉगिंग को देखा.... न कुछ लिखें, आज फिर दिल ने…
Khushdeep Sehgal
गुरुवार, जुलाई 15, 2010