Rana Sehri
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...यहां सब के सर पे सलीब है...खुशदीप
अलविदा जग'जीत'... 8 फरवरी 1941---10 अक्टूबर 2011 कोई दोस्त है न रक़ीब है, तेरा शहर कितना अजी…
सोमवार, अक्टूबर 10, 2011अलविदा जग'जीत'... 8 फरवरी 1941---10 अक्टूबर 2011 कोई दोस्त है न रक़ीब है, तेरा शहर कितना अजी…
सिर्फ़... मैं उस वक्त में लौटना चाहता हूं जब... मेरे लिए मासूमियत का मतलब, सिर्फ खुद का असल होना था... मेरे …
कल पहले हमें जेब खर्च के लिए 50 रुपये हर महीने मिला करते थे, हम उसमें से न स्कूल की आधी छुट्टी में जमकर खाते थे, …
ब्लॉगिंग को देखा तो ये ख्याल आया, जिंदगी धूप, ब्लॉगिंग घना साया, ब्लॉगिंग को देखा.... न कुछ लिखें, आज फिर दिल ने…