नाम है नैनसुख...खुशदीप
आज स्लॉग ओवर की बारी है...लेकिन मूड बनाने के लिए पहले नाम की थोड़ी चर्चा हो जाए...आप कहेंगे कि नाम में रखा क्या है...ल…
बुधवार, नवंबर 11, 2009आज स्लॉग ओवर की बारी है...लेकिन मूड बनाने के लिए पहले नाम की थोड़ी चर्चा हो जाए...आप कहेंगे कि नाम में रखा क्या है...ल…
Khushdeep Sehgal
बुधवार, नवंबर 11, 2009
हिंदी पिटी...बुरी तरह पिटी...अपने देश में ही पिटी... आखिर हिंदी है किस खेत की मूली...राष्ट्रीय भाषा कोई है हिंदी...जो म…
Khushdeep Sehgal
मंगलवार, नवंबर 10, 2009
पंच परमेश्वरों का निष्कर्ष है कि लेखन का सबसे अच्छा स्टाइल है कि कोई स्टाइल ही न हो...यानि फ्री-स्टाइल...आपकी सलाह सर म…
Khushdeep Sehgal
रविवार, नवंबर 08, 2009
मुद्दों पर आधारित गंभीर लेखन...हल्का फुल्का लेखन...स्लॉग ओवर...या इनका कॉकटेल...क्या लिखूं...मैं खुद कन्फ्यूजिया गया हू…
Khushdeep Sehgal
शनिवार, नवंबर 07, 2009
जी हां, मुबारक हो दुनिया आगे जा रही है और हमने रिवर्स गियर पकड़ लिया है...ऊपर वाले ने चाहा तो हम जल्दी ही 1947 से पहले …
Khushdeep Sehgal
शनिवार, नवंबर 07, 2009
लिखना आज कुछ और चाहता था...लोकतंत्र की कीमत के मुद्दे पर...लेकिन कल मैं ब्ल़ॉगवाणी पर जाकर कई बार शर्मिंदा हुआ...शर्मसा…
Khushdeep Sehgal
शुक्रवार, नवंबर 06, 2009
आज़ादी के बाद हमने क्या खोया और क्या पाया...आज इस पर विमर्श के लिए सिर्फ और सिर्फ कुछ सवाल रखूंगा...लेकिन उससे पहले आज …
Khushdeep Sehgal
गुरुवार, नवंबर 05, 2009
अंग्रेज़ों ने हमसे क्या लूटा...और बदले में भारत को क्या दिया...सवाल पुराना है...लेकिन ज्वलंत है...और शायद हमेशा रहेगा भ…
Khushdeep Sehgal
बुधवार, नवंबर 04, 2009
बड़े दिन से अपनी पोस्ट के ज़रिए गंभीर विमर्श करता रहा...इसलिए आज ट्रैक बदल रहा हूं...स्लॉग ओवर भी बेचारा एक कोने में दु…
Khushdeep Sehgal
मंगलवार, नवंबर 03, 2009
आपने ब्रेक के बाद भी महावीर और जानकी देवी की कहानी पर विमर्श की आखिरी कड़ी लिखने के लिए प्रेरित किया...उसके लिए मैं आप …
Khushdeep Sehgal
रविवार, नवंबर 01, 2009