बदला ज़माना
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कितना बदल गया इनसान...खुशदीप
देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इनसान, कितना बदल गया इनसान... दशकों पहले कवि प्रदीप का …
मंगलवार, मार्च 29, 2011देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इनसान, कितना बदल गया इनसान... दशकों पहले कवि प्रदीप का …
इनसान तरक्की के लिए कितना मारा-मारी करता है...लेकिन कुदरत के आगे कैसे सारा विकास एक झटके में बह जाता है, ये ब्लैक फ्रा…
पंछी, नदिया, पवन के झोंके, कोई सरहद न इनको रोके, सरहदें इनसानों के लिए है, सोचो तुमने और मैंने क्या पाया इनसां होके.…
दो-तीन दिन पहले सतीश सक्सेना भाई ने देश की गंगा जमुनी तहज़ीब का हवाला देते हुए पोस्ट लिखी थी...साथ ही कौमी सौहार्द की…
समारोह में किसी का सम्मान हो गया है, क्या आदमी वाकई इनसान हो गया है... सिर पर पत्थर उठाता है बबुआ, क्या बचप…