सिविल सोसायटी
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जनता या मंदिर का घंटा, जो चाहे आकर बजा दे...खुशदीप
नेता...हम जनता के नुमाइंदे हैं... सिविल सोसायटी- हम जनता के नुमाइंदे हैं... नेता...विरोधी कुछ भी कहें, हमें जनता …
मंगलवार, अप्रैल 19, 2011नेता...हम जनता के नुमाइंदे हैं... सिविल सोसायटी- हम जनता के नुमाइंदे हैं... नेता...विरोधी कुछ भी कहें, हमें जनता …
Khushdeep Sehgal
मंगलवार, अप्रैल 19, 2011
दबंगपुर में दबंग नेताओं का चारों तरफ दबदबा था...शरीफ़ इनसानों की तो जैसे वहां शामत आई हुई थी...किसी को किसी बात पर भी ह…
Khushdeep Sehgal
शुक्रवार, सितंबर 03, 2010
एक आदमी की प्रार्थना से ईश्वर प्रसन्न हो गए... बोले... वत्स अपनी कोई इच्छा हो तो बता ... आदमी बोला... भगवन् मेरी इच्छ…
Khushdeep Sehgal
मंगलवार, जुलाई 20, 2010
पत्रकार का पेशा भी गजब हो गया है...अगर आप पत्रकार हैं और किसी भ्रष्टाचारी नेता को चोर लिखते हैं तो पहले सौ बार ऊंच-नीच …
Khushdeep Sehgal
मंगलवार, मई 18, 2010