समीर जी की किताब- इतना पहले कभी नहीं हंसा...खुशदीप
पिछली पोस्ट से आगे... समीर जी की उपन्यासिका देख लूँ, तो चलूँ पर कुछ लिखूं, इससे पहले ही बता दूं कि इस किताब में ए…
रविवार, जनवरी 30, 2011पिछली पोस्ट से आगे... समीर जी की उपन्यासिका देख लूँ, तो चलूँ पर कुछ लिखूं, इससे पहले ही बता दूं कि इस किताब में ए…
Khushdeep Sehgal
रविवार, जनवरी 30, 2011
गुरुदेव समीर लाल समीर जी की हाल ही में विमोचित हुई उपन्यासिका... देख लूँ तो चलूँ... 21 जनवरी को मेरे लखनऊ जाने से पहल…
Khushdeep Sehgal
शनिवार, जनवरी 29, 2011
कल की पोस्ट पर लखनऊ में सरदार बच्चे के सामने मिमियाते दो सांडों का ज़िक्र किया था..सभी ने इस पोस्ट को अपने अंदाज़ से ल…
Khushdeep Sehgal
शनिवार, जनवरी 29, 2011
कल की पोस्ट के वादे के मुताबिक आपको दो सांडों के चूहा बनने का आंखों देखा हाल सुनाऊंगा...लेकिन पहले महागुरुदेव अनूप शुक्…
Khushdeep Sehgal
शुक्रवार, जनवरी 28, 2011
मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं... या लखनऊ हम पर फिदा, हम फिदा-ए-लखनऊ, किसमें है दम इतना, कि हम से छुड़वाए लखनऊ... …
Khushdeep Sehgal
गुरुवार, जनवरी 27, 2011
पिछले पांच दिनों में गणतंत्र के सफ़र के कुछ पहलुओं को आप तक पहुंचाने की कोशिश की...इस तरह की पोस्ट पर तात्कालिक सफ़लता…
Khushdeep Sehgal
बुधवार, जनवरी 26, 2011
1987 से 1997 के दौर में ही देश ने मंडल-कमंडल की राजनीति को पूरे उफ़ान पर देखा.. 16 जुलाई 1987 को पूर्व वित्त मंत्री आर…
Khushdeep Sehgal
मंगलवार, जनवरी 25, 2011
11 फरवरी 1977 को फ़खरूद्दीन अली अहमद के आकस्मिक निधन के बाद नीलम संजीवा रेड्डी जनता पार्टी के राज में राजनीतिक सर्वसहम…
Khushdeep Sehgal
सोमवार, जनवरी 24, 2011
दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन नेहरू की तरह राजनेता नहीं थे। नेहरू से उलट राधाकृष्णन धार्मिक प्रवृत्ति के थे…
Khushdeep Sehgal
रविवार, जनवरी 23, 2011
कल की कड़ी में आपने पढ़ा था कि किस तरह गणतंत्र के तौर पर भारत में सरकार चलाने की व्यवस्था का चुनाव किया गया था...आज की…
Khushdeep Sehgal
शनिवार, जनवरी 22, 2011