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ब्लॉगवाणी, सुन ले अर्ज़ हमारी...खुशदीप
ज़रा सामने तो आओ छलिए, छुप-छुप छलने में क्या राज़ है, यूं छुप न सकेगा परमात्मा, मेरी आत्मा की ये आवाज़ है... …
गुरुवार, जून 10, 2010ज़रा सामने तो आओ छलिए, छुप-छुप छलने में क्या राज़ है, यूं छुप न सकेगा परमात्मा, मेरी आत्मा की ये आवाज़ है... …
Khushdeep Sehgal
गुरुवार, जून 10, 2010
कल मैंने काफ़ी के कप पेश किए थे...पता नहीं किसी सज्जन को काफ़ी का टेस्ट इतना कड़वा लगा कि उन्हें बदहजमी हो गई...शायद उ…
Khushdeep Sehgal
बुधवार, मई 05, 2010